भारत विकास परिषद्, पंचकूला – एक संक्षिप्त इतिहास
भारत विकास परिषद् की पंचकूला शाखा की स्थापना वर्ष 1991 में हुई। इसकी प्रेरणा और मार्गदर्शन भारत विकास परिषद्, चंडीगढ़ के पदाधिकारियों से प्राप्त हुआ। श्री अविनाश जैन अपने सहयोगी मित्रों श्री सुरेन्द्र पाल धीर (एस. पी. धीर) एवं श्री सत्यपाल कैंथ के साथ पंचकूला आए और यहां परिषद् कार्य का शुभारम्भ किया।
शाखा के प्रथम अध्यक्ष श्री देवेन्द्र सेन वर्मा बने, जबकि श्री सुरेन्द्र पाल धीर सचिव तथा श्री सत्यपाल कैंथ कोषाध्यक्ष नियुक्त हुए। उस समय संसाधन सीमित थे। अधिकांश कार्यकर्ता स्कूटर अथवा साइकिल से ही आवागमन करते थे।
श्री सत्यपाल कैंथ स्वयं साइकिल पर जाकर दान संग्रह करते और परिषद् का समस्त आवश्यक सामान एक कपड़े के थैले में लेकर चलते थे। उनकी सादगी, समर्पण और अथक परिश्रम के कारण उन्हें परिषद् का “गांधी” कहा जाता था।
संस्थापकों ने नगर के अनेक प्रतिष्ठित चिकित्सकों और समाजसेवियों को परिषद् से जोड़ा। अगले वर्ष डॉ. भूषण कुमार सूद को सचिव तथा श्री सुरेन्द्र पाल धीर को अध्यक्ष बनाया गया। इस काल में महिलाओं की भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई।
अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम, गोष्ठियाँ और सामाजिक जागरूकता अभियान आयोजित किए जाने लगे। वर्ष 1993 में सामयिक विषयों पर गोष्ठियाँ आयोजित करने का दायित्व सौंपा गया।
परिषद् को हरियाणा सरकार से भूमि प्राप्त हुई, जहां आज परिषद् भवन स्थित है। भवन निर्माण में सभी सदस्यों ने बढ़-चढ़कर योगदान दिया।
डॉ. केशव प्रकाश गर्ग, श्री कुलदीपक लाल, श्री केदारनाथ गुलाटी तथा श्री जयपाल गुप्ता का विशेष योगदान रहा। सीमित संसाधनों के बावजूद सदस्यों के सहयोग से भवन का बेसमेंट और भूतल निर्मित किया गया।
उस समय श्री सी. बी. गोयल अध्यक्ष, श्री जयपाल गुप्ता सचिव और श्री अविनाश अरोड़ा कोषाध्यक्ष थे। बाद में श्री केदारनाथ गुलाटी भी अध्यक्ष बने।
सचिव के रूप में श्री जयपाल गुप्ता ने भवन निर्माण हेतु आर्थिक सहायता जुटाने और संगठन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
समय के साथ परिषद् के प्रमुख वार्षिक कार्यक्रम “भारत को जानो प्रतियोगिता” और “समूहगान प्रतियोगिता” नियमित रूप से आयोजित होने लगे।
राष्ट्रीय समूहगान प्रतियोगिता के संयोजन का दायित्व श्री विनोद जैदका ने सफलतापूर्वक निभाया।
नवंबर 2006 में श्री जयपाल गुप्ता का निधन परिषद् परिवार के लिए अत्यंत दुखद घटना थी। वे एक समर्पित, कर्मठ और जिम्मेदार कार्यकर्ता थे।
इसके बाद संगठनात्मक जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण किया गया। प्रांत संरक्षक श्री दर्शन लाल जैन के मार्गदर्शन में शाखा सचिव का दायित्व संभाला गया।
वर्ष 2008 से 2012 तक श्री रमेश चंद्र चोदना तथा श्री चुन्नीलाल महोता क्रमशः अध्यक्ष रहे। बाद में श्री कृष्ण लाल गोयल ने सचिव का दायित्व संभाला।
समय के साथ डॉ. लक्ष्मी नारायण गुप्ता, श्री सुभाष मंगल, श्री पीयूष जैन, श्री अशोक गुप्ता, श्रीमती अनुपमा नांगिया तथा अनेक समर्पित कार्यकर्ता परिषद् से जुड़े।
भारत विकास परिषद्, पंचकूला की यह यात्रा समर्पण, सेवा, संस्कार और संगठन शक्ति की प्रेरणादायक कहानी है। यह संगठन आज भी समाज सेवा के अपने उद्देश्यों की ओर सतत अग्रसर है।